कहानी लेखक : योगेश चंद्र शर्मा

लीगल राइट्स – यह कहानी पूर्ण रूप से कल्पना पर आधारित हे एवं लेखक द्वारा इसे स्वयं लिखा गया हे। इस कहानी को बिना लेखक की लिखित अनुमति के किसी भी रूप में कही भी प्रदर्शित करने का अधिकार किसी को भी व्यक्ती को नहीं हे यदि कोई ऐसा करता पाया गया तो लेखक उस व्यक्ति पर क़ानूनी कार्यवाही हेतु स्वतंत्र हे एवं इससे होने वाले समस्त हर्जे खर्चे का जिम्मेदार वो व्यक्ति स्वयं होगा।

मरा कौन हे ?

प्लीज मेरी मदद करो….

अचानक से एक लड़की की इस आवाज़ सुन कर में उठ बैठा समझ ही नहीं आरहा था आस पास हो क्या रहा हे …

जहा तक मुझे याद हे जब मै बस मै बैठा तो सुबह हो रही थी और मुश्किल से अभी एक घंटा भी नहीं हुआ होगा तो फिर यह शाम जैसा अँधेरा कैसे संभव हे ?

अरे क्या कर रहे हो तुम…मेरी मदद तो करो फिर से उसी लड़की की आवाज़ मेरे कानो मै गूंज उठी

कही मै सपना तो नहीं देख रहा या फिर कही ऐसा तो नहीं की अभी तक मेरी नींद पूरी नहीं हुई जिस वजह से मेरे साथ ऐसा कुछ भ्रम हो रहा।

अरे कर क्या रहे हो तुम …. फिर से वही आवाज़ आयी।

इस बार मेने गुस्से मै बोल दिया मै क्या कर रहा हु तुम्हे इससे क्या मतलब…और तुम हो कौन जो मेरे से यह सब पूछ रही वैसे भी तुम तो मुझे दिखाई तक नहीं दे रही मै मदद करू भी तो किसकी करू।

दबी सी आवाज़ मै उस लड़की ने कहा मै यहाँ बस की सबसे पीछे वाली सीट पर हु।

हा तो पीछे बैठ कर क्या बोल रही हो, सामने आओ, और सामने आकर बोलो जो मदद चाहिए हो मै करूँगा।

मै यदि सामने आयी तो वो लोग मुझे मार देंगे (उस लड़की ने अचानक रोते हुए कहा।)

उस लड़की के रोने की आवाज़ इतनी डरावनी थी की डर के मारे मेरा हाल बेहाल होने लगा पर शायद यही वजह हो जिसकी वजह से फ़िलहाल उसे मेरी मदद की जरूरत हो वैसे भी जब लड़की की आवाज़ उधर से आरही हे तो लड़की भी उधर ही होगी बस यही सोच कर मै खुद को संभालते हुए बस की सबसे पीछे वाली सीट की और बढ़ चला।

परन्तु यह क्या! जैसे ही मै बस की सबसे पिछली सीट की और पंहुचा तो वहा यह देख कर डर गया की लड़की की आवाज़ यही से आने के बावजूद यहाँ मुझे कोई लड़की नहीं दिख रही थी।

मुझे अब ऐसा लगने लगा की अब मेरे साथ कुछ बुरा होने वाला हे और इसी डर की वजह से मेरा शरीर पसीने से भीग गया समझ ही नहीं आरहा था की क्या करू और ऐसा मेरे साथ क्यों हो रहा।

तभी मेरे पेरो की तरफ बस की सीट के निचे से एक हाथ निकला और उसने मेरे पेरो को बुरी तरह से जकड लिया। मै यह सब खुली आँखों से देख रहा था पर मेरी तो अब हिम्मत जवाब दे चुकी थी डर के मारे अब मै चाह कर भी सीट के निचे देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था, पर मरता क्या न करता आखिर जैसे तैसे हिम्मत कर के मै अपने घुटनो के बल बैठ कर बस की सीट के निचे देखने लगा
तभी अचानक से उस लड़की बस की सीट के निचे से ही आवाज़ देते हुए कहा …मेरी मदद करो प्लीज मुझे यहाँ से निकालो, मुझे उनसे बचा लो …
मेने खुद को जैसे तैसे संभालते हुए कहा यहाँ से बाहर तो तुम खुद भी आ सकती थी फिर तुम्हे इस काम मै मेरी क्या जरूरत और तुम्हे मै बचा कीस से लु पूरी बस मै सिर्फ तुम और मै ही तो हे पता नहीं बाकि सब कहा चले गए। (मुझे उस लड़की पर गुस्सा भी आरहा था पर डर के मारे मै ज्यादा कुछ बोल भी नहीं पा रहा था। )
अचानक से उस लड़की ने अपना एक हाथ ड्राइवर सीट की और बढ़ाते हुए कहा उनसे बचा लो मुझे।
जब मेने लड़की के बताये हुए हाथ की दिशा मै देखा तो मानो मेरे पेरो तले पूरी ज़मीं ही खिसक गयी जिस तरफ उस लड़की ने हाथ से इशारा किया वहा मुझे कुछ काले साये हलचल के साथ दिखाई दिए ।
मै कुछ समझ पाऊ उससे पहले वो काले साये तेज़ी से मेरी और बढ़ने लगे। ऐसा लगा मानो मेने उधर देख कर ही गलती की और अब तो मुझे खुद समझ नहीं आरहा था मै क्या करू कहा जाऊ कहा छुपाऊ खुद को। लगता हे इस लड़की ने खुद के साथ साथ मुझे भी मुसीबत मै डाल दिया।
तभी रोने की आवाज़ मेरी और बढ़ते सायों के साथ साथ और तेज़ होने लगी अब यह तेज़ आवाज़े मुझे बर्दाश्त ही नहीं हो रही थी।
एक तरफ वो लड़की रोये जा रही थी दूसरी तरफ वो साये मेरी तरफ बढ़ते जा रहे थे। सायों के इतना तेज़ी से मेरी और करीब आने से मै घबरा गया और जैसे ही अपने हाथो से अपनी आंखे बंद करने लगा तभी मुझे अहसास हुआ ये काले साये मेरे आर पार निकल चुके हे और उस लड़की की और बढ़ रहे हे अब यहाँ जो कुछ भी हो रहा मेरी समझ के पूरी तरह से बाहर था।
चलो चलो डेड बॉडी उठाओ उन सायों मै से एक आवाज़ ने कहा।
डेड बॉडी पार किसकी डेड बॉडी मै वहा अवाक् सा खड़ा खुद से ही मन ही मन यह प्रश्न पूछ रहा था तभी सायों मै से एक आवाज़ ने कहा एक डेड बॉडी यहाँ बस की सीट के निचे भी हे।
सब कुछ मेरी समझ से अब भी परे था पर अब मै अपने डर को भुला कर बस की उस लास्ट वाली सीट की और टकटकी लगाए हुए देखने लगा आखिर यह हो क्या रहा हे यहाँ? तभी उन सायों ने बस की सीट के निचे से एक लड़की की लाश को उठाया यह वही लड़की थी जो मुझे आवाज़ लगा रही थी। उस लड़की का हाथ अब भी ड्राइवर सीट की और इशारा कर रहा था एक बार फिर जैसे तैसे हिम्मत कर के मेने ड्राइवर सीट की और देखा और एक दम सन्न रह गया क्युकी इस बार मुझे कोई और नहीं स्वयं मै ही दिखा जो बन्दुक की गोली लगने से खून से लथपथ पड़ा था।
यह सब क्या हो रहा और यह सब मुमकिन कैसे हे ? मै इन्ही सभी सवालो मै पागलो की तरह उलझ रहा था तभी मेरी नज़रे बस की खिड़की से बाहर पड़ी रोने की आवाज़े वही से आरही थी ये वही लोग थे जो अपने अपने परिजनों की मोत का मातम मना रहे थे और एक तरफ एक पुलिस वाला कुछ पत्रकारों से गिरा था जो की उनसे कह रहा था की यहाँ कभी भी चोर लुटेरे अचानक से बस और कारो को लूट लेते हे और यही नहीं लूटने के बाद भी उन्हें गोली मार देते हे।
एक दम से बस मै कुछ और साये मेरे आर पार फिर से निकल गए परन्तु इस बार मै यह बात जान चुका था की आखिर मरा कौन हे।